Hindi moral story of Fisherman And Fish


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Fisherman And The Fish / मछुआरा और मछली


एक युवा महुआरा रहता था । वह प्रतिदिन अपनी नाव में बैठकर समुद्र में मछली पकड़ने जाता था । एक दिन जैसे ही उसने अपना जाल खींचा , उसे वह बड़ा ही भारी लगा । जब उसने जाल के अंदर देखा , उसे एक मछली दिखाई पड़ी ।
 
Hindi moral story of Fisherman And  Fish
Hindi moral story of Fisherman And  Fish

 कृपा करो मछुआरे , " मछली बोली " कृप्या , मुझे जाने दो । मछुआरा बहुत ही दयालु था । उसे बेचारी मछली पर दया आई । ठीक है वह बोला । उसने मछली को वापस पानी में डाल दिया ।


तुम्हारा धन्यवाद तुम महुआरे  तुम बहुत अच्छे आदमी हो , ” महली ने कहा । अगले दिन , मछुआरा फिर मछली पकड़ने आया । अचानक उसने एक आवाज़ सुनी । यह वही मछली थी जिसे उसने कल बचाया था ।




मछुआरे, मछुआरे,  कृप्या मेरे साथ आओ , " मछली बोली । कहाँ ? " मछुआरे ने पूछा । समुद्र के नीचे , " मछली ने उत्तर दिया । फिर मछली ने मछुआरे को अपनी पीठ पर बैठाया और तैरकर नीचे चली गई ।


वह तैरकर समुद्र ने नीचे पहुँची । समुद्र के नीचे एक सुन्दर महल था । मछुआरा मछली की पीठ से नीचे उतरा और महल के अंदर चल पड़ा । वहाँ उसे समुद्र का राजा मिला


तुम्हारा स्वागत है , नौजवान " , समुद्र के राजा ने कहा" मेरी , बेटी पर दया करने के लिए मैं तुम्हारा धन्यवाद करना चाहता हूँ । आपकी बेटी कौन है ? " मछुआरे ने पूछा ।


तुम अपने पीछे देखो ,राजा ने बोला । मछुआरे ने अपने पीछे एक सुन्दर राजकुमारी देखी । वह मछली वास्तव में एक सुन्द जवा राजकुमारी थी ।
क्या मैं सपना देख रहा हूँ ? " मछुआरे ने साचा


पर यह सपना नहीं था क्या तुम मुझसे विवाह करोगे ? " राजकुमारी ने पूछा मछुआरा राजकुमारी से विवाह हेतु बहुत खुश हुआ , उसे उससे प्यार हो गया | उस युवा मछुआरे का विवाह समुद्र की राजकुमारी से हो गया और वे हमेशा के लिए खुशी से रहने लगे ।




Story no-2


Hindi kahaniya and village life 





 भारत एक कृषि प्रधान देश है यहाँ अधिकतर लोग गाँवों में रहते हैं । कुछ गांव बड़े हैं , कुछ छोटे हैं । गाँव के अधिकतर लोग किसान हैं । यहाँ पर दुकानदार , लुहार , कुम्हार , बढ़ई और भी अन्य है ।

 
Hindi kahaniya and village life
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 किसानों को सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है । वे अपने खेतो में दिनभर काम करते है । वे सुबह जल्दी जाग जाते हैं और अपने बैलों के साथ अपने खेतों में पहुंच जाते हैं । वे अलग अलग तरह के फसल उगाते है   


गाव का जीवन बड़ा ही साधारण है । महिलाएँ खाना पकाती है । वे कुएँ से पानी खींचती हैं । गाँव के लोगों का भोजन स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है । वे मोटे कपड़े पहनते हैं । उनमें से अधिकांश अशिक्षित होते हैं । वे बहुत गरीब होते हैं , फिर भी वे खुश रहते हैं



 गाँव में मकान समान्यतः मिट्टी , फूस और लकड़ी से बने होते हैं । पगडंडी भी मिट्टी की बनी होती हैं । यहाँ पर कुछ मकान ईट बने हुए हैं । इनमें कस्बो की तरह सुख साधन नहीं है ।


गाँव के लोग बड़े धार्मिक है । वे अनेक देवी देवताओ की पूजा करते है उनमे से कुछ तो अशिक्षा के कारण बड़े ही अंधविस्वाशी है | फिर भी मुझे गाव का जीवन मुझे बहुत पसंद है 

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एक कस्बे में एक अमीर बूढ़ी महिला रहती थी । उसका एक कुत्ता था । वह अपने कुत्ते से बहुत प्यार करती थी । एक बार वह एक बहुत अच्छे कलाकार के पास गई ।


कलाकार से अपनी तस्वीर बनाने के लिए कहा । कलाकार ने कई दिनों तक उसकी तस्वीर पर बड़ी मेहनत की । जब वह तस्वीर तैयार हो गई , उसने उस महिला को अपने स्टूडियो में बुलाया

Intelligent artist moral Hindi story

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वह बूढ़ी महिला स्टूडियो आई । वह अपने साथ अपना कुत्ता भी ले गई । वह कुत्तों की बड़ी शौकीन थी । उसका यह विश्वास था कि वह नन्हा सा जानवर इस संसार का सबसे चतुर जानवर है



उस महिला ने तस्वीर अपने कुत्ते को दिखाई । " देखो , प्यारे टौमी , ” उसने कहा , “ यहाँ है मालकिन । पर कुत्ते ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई 


महिला कलाकार की ओर मुड़ी और बोली , “ मुझे यह तस्वीर नहीं चाहिए । यह बिल्कुल भी मेरी तरह नहीं लग रही है । बल्कि मेरा चतुर जानवर भी मुझे इस तस्वीर में पहचान नहीं पाया ।


कलाकार सांसारिक बुद्धिमान था । वह धनवान लोगों के अजीब ठंगों को जानता था । अत : उसने बहस नहीं की । उसने सरलता से कहा , “ मोहतरमा , कृप्या आप कल फिर आना । मैं आपकी तस्वीर इतनी सच्चाई से बनाऊँगा कि आपका टौमी अपनी पूँछ हिलाएगा और उसे चाटेगा ।



अगले दिन , महिला दोबारा स्टूडियो पहुँची कुत्ता अपनी पूँछ हिलाने लगा और तस्वीर की तरफ दौड़ा , वह बड़ी ही रूचि से उसे चाटने लगा


महिला बोली , “ कितना सुन्दर ! कितना आश्चर्यजनक ! मेरे टौमी को तस्वीर पसंद आई है तो मुझे भी यह बहुत पसंद है । कृप्या इसे लपेट दो । " कलाकार ने बड़ी कीमत माँगी और उसने खुशी - खुशी कीमत चुकाई ।



कलाकारउसके जाने के बाद दिल से हसा । उसने उस तस्वीर को माँस के रसीले टुकड़े से रगड़ा । माँस की सुगंध ने कुत्ते को तस्वीर चटवाई


Hindi moral story Part-2

Donkey and men Hindi story & moral Kahani



एक कुम्हार और उसका बीटा एक गधे पर सवार होकर शहर के लिए चल पड़े । रास्ते में उन्होंने सभी का अभिवादन किया । तुम कितने निर्दयी हो एक बूढ़ा व्यक्ति उनसे बोला , “ बेचारा गधा ! तुम्हारे वजन से मर जाएगा ।

कृप्या , एक बार में एक ही जना सवार हो । कुम्हार ने उसकी राय मानी और जानवर से नीचे उतर गया । अब उसके ऊपर केवल छोटा सा लड़का था ।



 वे थोड़े आगे पहुँचे ही थे की , दूसरा आदमी कहते हुए आया , “ इस छोकरे को अपने पिता पर दया नहीं आ रही है । वह मज़े से सवारी कर रहा है । पर पिता पैदल चल रहा है । " लड़के को बड़ी शर्म आई । उसने पिता से आग्रह किया की उसके स्थान पर वे सवारी करें ।

 
Donkey and men Hindi story & moral Kahani

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समस्या वहीं पर समाप्त नहीं हुई ।
अरे मेरे भगवान ! एक बुजुर्ग महिला रो पड़ी , “ यह सब क्या है ? इस छोटे से लड़के के लिए मेरा दिल रो रहा है । यह पैदल चल रहा है पर पिता तो मज़े से गधे पर सवारी कर रहा है ।





कुम्हार और उसके बेटे ने , अब , निश्चय किया वे उस जानवर की और सवारी नहीं करेंगे । उन्होंने उसकी रस्सी पकड़ी और पैदल चलने लगें । अब वे बहुत ही ज्यादा थक गए थें ।




तुम कितने बेवकूफ हो ! इस गधे का क्या फायदा है ? तुम दोनों इस पर सवारी क्यों नहीं कर रहे हो ? " यह बुद्धिमानी के शब्द उस दोस्त की तरफ से निकले जिसे उन पर दया आई ।




 पिता और बेटे ने धैर्य खो दिया । पिता ने निराश होकर अपने बेटे से कहा , " मेरे प्यारे , लोग बड़े निर्दयी हैं । वे हमेशा तुम्हारे में दोष निकालते हैं । तुम एक साथ सभी को प्रसन्न नहीं कर सकते । सबसे बेहतर हम गधे को अपने कँधों पर उठा लेते हैं




बेटे ने उस जानवर को  उठाया और अपने कंधों पर रखा । पिता ने उसके पिछले पैरो को अपने कंधों पर रखा और धीरे से चलने लगे ।

गधा बेचारा उन पर सवार होकर डरा हुआ था । उसे परेशानी महसूस हुई , उसने उन्हें बड़े ज़ोर से रैक मारी । कुम्हार और उसका बीटा दोनों जमीं पर चित्त गिर पड़े |

Hindi moral story for kid


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एक बार एक शेर था वह जंतुओं का राजा था । एक दिन उसने जंतुओ और पक्षियों को अपने पास बुलाया । हाथी , बाघ , हिरण , लोमड़ी , बाज़ , बत्तख और मेंढक उसके पास आए । शेर पत्थर पर बैठ गया । जंतु उसके निकट बैठ गए । तब शेर ने कहा , " मैं तुम्हारा राजा हूँ । मेरा मंत्री कौन बनेगा ?


 
Hindi moral stories of Lion and lomadi

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शेर ने जंतुओं और पक्षियों की ओर देखा 

सबसे पहले हाथी बोला । उसने कहा , " मैं बड़ा और ताकतवर हूँ , मैं वृक्षों से आपके लिए पत्तियों और फल ला सकता हूँ । मैं आपके राज्य की निगरानी रख सकता हूँ । मैं आपका मंत्री बनूंगा


अब , बाघ बोला ,मैं बहुत ताकतवर हूँ । मैं जंतुओं को मार सकता हूँ और आपके लिए भोजन ला सकता हूँ । मैं आपका मंत्री बनूँगा ।


बाज ने कहा , " हे राजा मेरी ओर देखो मेरे पास मजबूत पंख हैं  मैं आकाश में उड़ सकता हूँ । मैं आकाश से आपके राज्य की देखभाल कर सकता हूँ ।

उसके बाद बत्तख बोली । उसने कहा , " मैं उड़ नहीं सकती हूँ परंतु मैं तैर सकती हूँ । आपके राज्य में नदियाँ और तालाब हैं । मैं वहाँ से आपके लिए अच्छी मछलियाँ ला सकती हूँ । मैं आपकी मंत्री बनूँगी





मेढक बोला हे राजा  उसने कहा  मैं धरती पर रह सकता हूँ और मैं जल में रह सकता हूँ । मैं धरती और साथ ही साथ जल की देखभाल कर सकता हूँ । मैं आपका मंत्री बनूँगा



सबसे अंत में लोमड़ी बोली , " ओ राजा । न मैं बड़ी हूँ और न ताकतवर हूँ । मैं जंतुओं को नहीं मार सकती हूँ । मैं न उड़ सकती हूँ और न तैर सकती हूँ । मगर मैं चतुर हूँ । ये जंतु चतुर नहीं हैं । मैं आपकी मंत्री बनूँगी ।


अंत में शेर बोला लोमड़ी मेरा मंत्री बनेगी






Hindi story Part-2


the story in Hindi of flying



 मानव आकाश में पक्षियों को उड़ते देखकर उत्तेजित होता था । उसे भी उड़ने की इच्छा हुई और वह इसके लिए रास्ते खोजने लगा । भारी शरीर और पंख न होने के कारण , वह अपना साहस छोड़ देता । मगर आकाश में उड़ने की उसमें तीव्र इच्छा थी ।

 
the story in Hindi of flying

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उड़ने का प्रथम प्रयास जॉन मैन नामक एक उत्सुक और साहसी नवयुवक द्वारा किया गया था । उसने दो पंख बनाए और उन्हें पकड़े हुए वह किले की ऊँची दीवार से कूद गया ।
आह ! वह सतह पर गिर गया और अपने आपको चोटिल कर लिया । यह उड़ने का प्रथम एतिहासिक प्रयास था ।


उसने दो पंख बनाए और उन्हें पकड़े हुए वह किले की ऊंची दीवार से कूद गया । आह ! वह सतह पर गिर गया और अपने आपको चोटिल कर लिया । यह उड़ने का प्रथम एतिहासिक प्रयास था


लगभग 200 वर्ष पूर्व फ्रांस के माउन्ट और गॉलफियर नामक भाईयों ने गुब्बारा बनाया । वह पतले कपड़े का बना हुआ था ।

उन्होंने आग जलाकर उसे गर्म हवा और धुएँ से भर दिया । उन्होने गुब्बारे से एक टोकरी लटका दी ।

टोकरी में भेड़ , मुर्गी और बत्तख को रखा गया । गुब्बारा फ्रांस के राजा और रानी की उपस्थिति में उड़ने के लिए तैयार था ।

माउंट गॉल्फियर भाईयों ने गुब्बारे को उड़ाया उसने सफल उड़ान भरी । अत  जंतु और पक्षी उड़ान भरने वाले प्रथम यात्री थे ।


इस सफल प्रयोग से लोगों को प्रोत्साहन मिला । फ्रांस के गेजियर ने एक और गुब्बारा बनाया । वह और उसका मित्र लैन्डस गुब्बारे की सहायता से उड़े । वह हवा में बीस मिनट तक रहे । हवा में उड़ने वाले वे संसार के प्रथम व्यक्ति थे ।


हाइड्रोजन गैस के आविष्कार के पश्चात् गुब्बारे में उड़ना सरल हो गया क्योंकि हाइड्रोजन गैस वायु से हल्की होती है । अब , हवा को बार - बार गर्म करने की कोई आवश्यकता नहीं थी । चास ग्रीन ने सफलतापूर्वक लंदन से 500 किमी तक की दूरी 18 घंटों में तय की ।



गुब्बारे में उड़ने में सबसे बड़ी कमी थी कि इसे इच्छित दिशा में मोड़ा नहीं जा सकता था । इसका परिणाम ग्लाइडर के आविष्कार के रूप में सामने आया ।

ग्लाइडर में कोई मशीन नहीं चौ । उसमें केवल पख थे । उड़ान सरल थी फिर भी इसके संचालन पर कोई नियंत्रण नहीं था ।


राइट बंधुओं इसमें मशीन डाल दी । उन्होंने ग्लाइडर के मशीनीकरण में उल्लेखनीय सुधार किया । अब इसे इच्छित दिशा में मोड़ा जा सकता था और सफलतापूर्वक उड़ाया जा सकता था । राइट बधुओं को हवाई जहाज का आविष्कारक कहा जाता है ।

7 सितम्बर  1903 की पतः राइट बंधुओं का हवाई जहाज हवा में था और लोग आश्चर्यचकित थे ।


Moral Hindi story Part-3

Hindi moral story for kids






राबर्ट ब्रूस स्कॉटलैंट का राजा था , उसके कई सारे शत्रु थे । उसके शत्रु ने उस पर आक्रमण कर दिया । उसने बहादुरी से अपने शत्रु का सामना किया । परंतु उसकी हार हो गई । फिर भी उसने अपना धैर्य नहीं खोया ।

उसने पुन सेना को संगठित किया और अपने शत्रु से युद किया । वह पुनः युद्ध हार गया । इस प्रकार उसने कई बार अपने शत्रु से युद्ध किया , परंतु हर बार उसकी हार हुई । आखिरकार उसे अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने की आशा नहीं रही । उसने अपने आपको एक गुफा में छिपा लिया

 
Hindi moral story for kids

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वह एक निर्जन स्थान पर बैठ गया और अपने दुर्भाग्य को कोसने लगा । तभी उसने देखा कि एक मकड़ी अपने जाले की ओर जाने का प्रयास कर रही हैं । परंतु कुछ समय बाद वह नीचे गिर गई । परंतु मकड़ी ने बार बार  प्रयास किया ।

वह अपने प्रयास में आठ बार विफल हुई । नवे प्रयास में वह अपने लक्ष्य तक पहुंच गई । तब ब्रूस ने स्वयं से कहा  अगर यह नन्हीं मकड़ी बार  बार प्रयास करके सफलता प्राप्त कर सकती है  तो मैं क्यों नहीं

उसने पुन एक विशाल सेना एकत्रित की । उसने अपने शत्रु के विरूद्ध युद्ध किया और विजयी हुआ । यह सिद्ध करता है कि हमें कभी आशा नहीं छोड़नी चाहिए , बार बार प्रयास करना चाहिए और सफलता अंत में मिलती है

Hindi story Part-4

 Hindi kahaniya of ram chanda


वनवास के समय , लक्षमण ने बन में  आते हुए लोगों का विशाल जुलूस देखा । वे चिल्लाए  हे राम भईया हे भैया भरत यहा अपनी लोभनी माता के साथ आप से लड़ाई अर्ने के लिए यहा आ रहा है वह हमेशा के लिए अपनी मार्ग साफ चाहता है ताकि वह बिना किसी विरोध का अयोध्या पर शासन कर सके


राम ने डॉटा , " नहीं भरत वैसा सोच भी नहीं सकता है जैसा तुम कह रहे हो । यहाँ तक कि भारत का सिहांसन भी उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित नहीं कर सकता है । वह निश्चित हो अपने हृदय में कुछ प्रेमपूर्ण उद्देश्य लिए हुए आ रहा होगा


Hindi kahaniya of ram chanda

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जुलूस राम की कुटिया तक पहुंचा । राजकुमार राम ने भरत का अभिवादन किया । लक्ष्मण अभी भी शंकालू थे । भरत् राम के पैरो पर गिरकर बुरी तरह रोने लगे ।

रोते हुए भारत ने कहा , " भईया , में बुरी तरह शर्मिदा हूँ कि मेरी माता ने आपको बलपूर्वक वनवास पर भेज दिया और सिंहासन मेरे लिए रिक्त  कर दिया । हे भईया पिता जी का निधन हो गया है



राम ने भरत को गले लगा लिया और भरत अभी भी कह रहे थे , " मैं कभी भी आपका स्थान नहीं लूंगा । हमारे ज्येष्ठ भ्राता होने के कारण अयोध्या का राज सिंहासन सदा आपका रहेगा ।




राम ने कहा मैंने पूरे चौदह वर्ष वनवास में गुजारने का वचन दिया है । नहीं , मैं अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोडूंगा । तुम अयोध्या लौट जाओ और मेरे स्थान पर राज करो , " राम ने कहा । राम अपने शब्दों पर दृढ़ थे ।




भरत ने कहा परंतु मैं आपके सिंहासन पर नहीं बैलूंगा । केवल आपकी खड़ाऊँ हो उस राजगद्दी पर रहेगी । भरत केवल राम को आजानुसार ही कार्य करेगा


निस्वार्थता और प्रेम का दृश्य दृष्टिगोचर था । भरत अयोध्या लौट गए । चौदह वर्षों तक राम की खड़ाऊँ अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान रहीं । किसी भी पल , भरत अपने बड़े भाई को धोखा देने के लिए नहीं ललचाए





राम चौदह वर्षों के पश्चात् सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौट आए । लोग प्रसन्न थे । उन्होंने अपने राजा के वापस आने पर खुशियों मनाई । आज हम इस दिन को दीपावली के रूप में मनाते हैं ।


रामायण एक महाग्रंथ है जो साफ –साफ निस्वार्थता, सभी के लिए प्रेम, माता पिता की आज्ञा मानना और अंततः बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय को दर्शाता है