objectives of Monetary of Monetary Policy


objectives of Monetary of Monetary Policy  
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             Monetary Policy


 Monetary Policy  
1 . कीमतों में स्थायित्व ( Price Stability )
कीमतों में स्थायित्व का तात्पर्य है कीमतों में आने वाले उतार - चढ़ाव को नियंत्रित करना । स्थायी कीमतें आम जनता के आत्म - विश्वास में वृद्धि करती है तथा व्यापार को प्रोत्साहित करती है । स्थायी कीमतें आय एवं सम्पति का न्यायपूर्ण वितरण भी सुनिश्चित करती है क्योंकि इस स्थिति में मुद्रास्फीति एवं अपस्फीति दोनों पर नियंत्रण रहता है ।

2 . विनिमय बरों में स्थायित्व ( Stability in Exchange Rates )
 जिन देशों की अर्थव्यवस्था विदेशी व्यापार पर निर्भर है वहाँ विनिमय दर में स्थायित्व लाना मौद्रिक नीति का अत्यन्त उपयोगी उद्देश्य होता है । यदि विनियम दरों में स्थायित्व है जो यह दर्शाता है कि देश की आर्थिक स्थिति में स्थायित्व है

3 . पूर्ण रोजगार की प्राप्ति ( Attainment of Full Employment )
पूर्ण रोजगार की अवस्था आर्थिक विकास और प्राकृतिक साधनों के अनुकूलतम् उपयोग को दर्शाती है । अत : बचत और निवेश में साम्य स्थापित करके पूर्ण रोजगार के लक्ष्य की प्राप्ति भी मौद्रिक नीति का स्वाभाविक उद्देश्य होता है । पूर्ण रोजगार का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए उत्पादन एवं माँग में वृद्धि होना आवश्यक है । आर्थिक उछाल ( Economic Boom ) के दौरान इसमें स्वतः । अपेक्षित वृद्धि होती है परन्तु , मन्दी के दौरान मौद्रिक नीति के माध्यम से बेरोजगारी को नियंत्रित किया जाता है ।

4 . आर्थिक विकास ( Economic Development ) मूल्य स्थिरता अथवा पूर्ण रोजगार का स्तर प्राप्त करने के उद्देश्य , आर्थिक प्रगति के लिए मात्र सहायक उद्देश्य होते हैं । वास्तव में इसका लक्ष्य है - आर्थिक विकास को बढ़ाना और उसका उच्च स्तर बनाए रखना । आर्थिक विकास में वृद्धि के लिए प्रभावी ढंग से बचतों को प्रोत्साहित करना तथा इस बचतों को नियो निवेश करना भी मौद्रिक नीति का प्रमुख उद्देश्य माना जाता है |

5. आय में स्थिरता ( Stability in Income ) .
मौद्रिक नीति द्वारा व्यापार चक्रों पर नियंत्रण लगाकर आय में अस्थिरता को कम किया जा सकता है । मौद्रिक नीति प्रसार व मुद्रा संकुचन के कारण उत्पन्न अस्थिरता को का में सहायक होती है ।

6. बचत एवं निवेश में साम्य ( Equality between Savings and Investment )

मौद्रिक नीति का उद्देश्य है - बचत एवं निवेश में साम्य बनाये रखना , ताकि पूर्ण रोजगार के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके । मौद्रिक नीति का एक उद्देश्य बचत एवं निवेश में वृद्धि करना भी है । मौद्रिक नीति जनता की आय में वद्धि करके उसे बचत के लिए प्रोत्साहित करती है । बचत होने से निवेश को भी प्रोत्साहन मिलता है ।

7.. आर्थिक स्थिरता ( Economic Stability )  
विकसित देशों में मौद्रिक नीति के लक्ष्य विकासशील अथवा अल्पविकसित देशों की अपेक्षा सीमित हैं । वहाँ इसका मुख उदेश्य आर्थिक स्थिरता बनाए रखना होता है । विकास के साथ मुदा । की मांग भी बढ़ती जाती है इसलिए , उचित मौद्रिक नीति के माध्यम से मुद्रा की माँग व पूर्ति में साम्य बनाए रखा जा सकता है ।

8. विकास के लिए साधन उपलब्ध करवाना ( Providing source | for Development )
उचित मौद्रिक नीति के माध्यम से देश के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक साधनों की व्यवस्था की जा सकती है । विकासशील देशों में विकास के लिए आवश्यक वित्तीय साधनों का अभाव होत है । इसलिए उचित मौद्रिक नीति अपनाकर आवश्यकतानुसार मुता एवं साख की आपूर्ति में वृद्धि की जा सकती है जो देश के आर्थिक विकास में सहायक होती है । 

State Bank of India

State Bank of India 

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SBI

1. इम्पीरियल बैंक के विलय के निर्णय के पश्चात् । जुलाई 1955 ई . को भारतीय स्टेट बैंक समूह का गठन हुआ । भारतीय स्टेट बैंक के 6 State Bank of India सहायक बैंक थे और ये सभी मिलकर स्टेट बैंक समूह का निर्माण करते थे तथा एक ही लोगो ( Logo ) का प्रयोग करते थे ।
2.स्टेट बैंक समूह के साथ छः सम्बद्ध सहायक बैंक वस्ततः पहले रजवाड़ों के अधीन बैंकिंग सेवा प्रदान करते थे । बाद में सरकार ने प्रिवी पर्स ( Privy Purse ) की समाप्ति के पश्चात् इसका अधिग्रहण कर लिया ( अक्टूबर 1959 से मई , 1960 के मध्य ) ।
3.भारत सरकार SBI में सभी सहायक बैंकों का विलय करके इसे एक मेगा बैंक ( Mega bank ) के रूप में बदलना चाहती है । इस दिशा में पहला कदम 13 अगस्त , 2008 को उठाया गया । जब स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र का विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कर दिया गया ।

4. पुनः 19 जून 2009 को भारत सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का भारतीय स्टेट बैंक में विलय की संस्तुति कर दी । इस बैंक में भारतीय रिजर्व बैंक की शेयरधारिता पहले से ही 98.3 % थी ।
5.अप्रैल 2017 को भारतीय स्टेट बैंक के पाँच सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक का विलय कर दिया गया है । विलय के पश्चात् भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं की संख्या 24000 हो गई हैं । भारतीय स्टेट बैंक में विलय होने वाले पाँचो बैंक निम्नलिखित हैं
1 . स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद
2 स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर
3 . स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
4 . स्टेट बैंक ऑफ पटियाला
5 . स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर

स्टेट बैंक देश का पहला वाणिज्यिक बैंक है जिसे नाबार्ड ने स्वयं सहायता प्रोन्नयन , संस्थान का दर्जा दिया है । SBI ने स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के लिए सहयोग निवास नामक योजना चलाई है ।
SBI द्वारा ग्रीन चैनल काउंटर ( Green Channel Counter ) का प्रारम्भ - स्टेट बैंक ने 1 जुलाई , 2010 से अपनी चुनिंदा शाखाओं में ग्रीन बैंकिंग चैनल नामक कई सेवाओं को प्रारम्भ किया है । ग्रीन चैनल काउंटर पर ग्राहक धन जमा करने तथा निकालने हेतु डेबिट कार्ड ( Debit Card ) का प्रयोग कर सकेंगे । यहाँ पर किसी कागज का प्रयोग नहीं होगा



मौद्रिक एवं साख नीति ( Monetary and Credit Policy )  
1.किसी देश की सरकार अथवा केंद्रीय बैंक द्वारा विशेष आर्थिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ( जैसे मूल्य स्थिरता , विनिमय दर में स्थिरता , रोजगार , आर्थिक विकास की दर को बढ़ाने आदि ) अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा के प्रसार तथा संकुचन के प्रबंधन को मौद्रिक नीति ( Monetary Policy ) कहा जाता है ।

मौद्रिक नीति में निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मुद्रा एवं साख की मात्रा को नियमित एवं नियंत्रित किया जाता है । एक अच्छी मौद्रिक नीति वह है जिसमें आंतरिक मूल्य स्तर में सापेक्षिक स्थिरता , विनिमय दरों में स्थायित्व , आर्थिक विकास , आर्थिक स्थिरता और रोजगार की समुचित व्यवस्था की जा सके ।

मौद्रिक नीति का कोई निश्चित व अपरिवर्तनशील सिद्धांत नहीं है । वरन् देश , काल एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार इसमें परिवर्तन किया जा सकता है । भारत में यह नीति भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित की जाती है ।

Commercial bank of India

Commercial bank of India

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Two type of commercial bank

1.अनुसूचित बैंक ( Scheduled Banks )
2.गैर - अनुसूचित बैंक ( Non - Scheduled Banksy

Commercial bank of India

अनुसूचित बैंक ( Scheduled Banks )

अनुसूचित बैंक ऐसे बैंक हैं जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक 1934 की द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित किया गया है ।
रिजर्व बैंक अधिनियम स अनसची में उन्हीं बैंकों को सम्मिलित किया जाता है जो कि निम्नलिखित शर्तों की पूर्ति करते हैं
1 . बैंक की प्रवत्त पूँजी और संचित कोष 25 लाख रुपए से कम न हो
2 . भारतीय रिजर्व बैंक को इस बात का विश्वास हो कि बैंक का कोई भी कार्य जमाकर्ताओं के लिए अहितकारी नहीं होगा ।
अनुसूचित बैंकों में सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के बैंक दोनों शामिल हैं ।

अनुसूचित बैंक ( Non - Scheduled Bank )

 1 जो बैंक रिजर्व बैंक अधिनियम - 1934 की दूसरी अनुसूचा शामिल नहीं है वे गैर - अनुसूचित बैंक कहलात के बैंकों की संख्या में अब निरंतर कमी हो रही है  

इन बैंकों को भी सांविधिक नकद कोष शर्तोको मानना पड़ता है  परन्तु ये बैंक इस कोष को रिजर्व बैंक के पासको बाध्य नही है ।

ये बैंक सामान्य कार्य उद्देश्यों हेतु रिजर्व बैंक स अधिकृत नहीं होते किन्तु असामान्य परिस्थितियों में बैंक से संपर्क करके ऋण प्राप्त कर सकते है |


वाणिज्यिक बैंकों के बैंकों के कार्य ( Functions of Commercial Banks )


 1.जमा स्वीकार करना ( Accepting Deposits )
बैंक का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है । वर्तमान में बैंक अपने ग्राहकों से तीन प्रकार की जमाएँ स्वीकार करते हैं 1 . बचत जमा 2 . मांग जमा 3 . सावधिक जमा ।

बचत जमा ( Saving Deposit ) :
 इस जमा पर बैंक की ब्याज दर कम है । इसका कारण यह है कि इसमें अपनी बचत जमा करने वाले सामान्यतः छोटी बचतें ही करते हैं । जमाकर्ता सप्ताह या वर्ष के दौरान एक सीमा तक अपनी राशि चेक के माध्यम से निकाल सकते हैं ।

मांग जमा , ( Demand Deposit ) :
 व्यवसायी अपनी जमा चालू खाते ( Current Account ) में करते हैं । वे अपने खाते में जमा कितनी   भी राशि को बिना किसी पूर्व सूचना ( नोटिस ) के चेक द्वारा निकाल सकते हैं । बैंक ऐसे खातों पर कोई ब्याज नहीं देता है . बल्कि अपने ग्राहकों को प्रदान की गई सेवाओं के बदले कुछ  राशि बतौर प्रभार ग्रहण करता है । चालू खातों को माँग जमा के रूप में जाना जाता है ।


सावधिक जमा ( Fixed Deposit ) :
 बैंक जमा को सावधिक या पियावी जमा के रूप में भी स्वीकार करता है । वे बचतकर्ता जिन्हें संचित राशि की आवश्यकता नहीं होती वे आजकल उसे 30 दिन की अवधि से अधिक समय के लिए बैंक के सावधि क ( मियादी ) जमा ( Time Deposit ) खाते में रख सकते हैं । ऐसी राशि पर बैंक जमाकर्ताओं को अधिक ब्याज ( Interest ) देता है ।

प्राथमिक जमाएँ ( Primary Deposits )
यह लोगों द्वारा वाणिज्यिक बैंकों में की गई नकद जमा है । ये बैंकों की कुल माँग जमाओं का एक भाग है ।

गौण या द्वितीयक जमाएँ ( Secondary Deposits )
यह उन जमाओं ( Deposits ) को कहते हैं जिनकी उत्पत्ति तब होती है । जब बैंकों द्वारा लोगों को ऋण दिया जाता है । ये भी बैंकों की कुल माँग जमाओं का एक भाग है ।

 2 . अग्रिम ऋण देना ( Advance Loan )
वाणिज्यिक बैंकों के मुख्य कार्यों में से एक अपने ग्राहकों को अग्रिम ऋण देना है । बैंक अपनी जमा राशि का कुछ प्रतिशत ऋण कर के रूप में प्रदान करता है ।

ऋण व्याज दर अपनी जमा पर देने वाले ब्याज दर की अपेक्षा  अधिक होती है ।


3 . 
साख निर्माण ( Credit Creation )
 साख निर्माण वाणिज्यिक बैंकों के कार्यों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है । अन्य वित्तीय संस्थाओं की तरह इनका उद्देश्य भी लाभ कमाना होता है ।
इस उद्देश्य के लिए बैंक दिन - प्रतिदिन विनिमय हेतु कुछ नकदी रिजर्व में रख कर जमा स्वीकार करता है और अग्रिम ऋण देता है । जब बैंक अग्रिम ऋण देता है तो ग्राहक के नाम पर एक खाता खोल दिया जाता है तथा उसे दिए गए ऋण का भुगतान नकद रूप से न करके उसकी आवश्यकताओं के अनुसार चेक ( Cheque ) द्वारा किया जाता है । ऋण मंजूर करके बैंक साख या जमा का सृजन करता है ।

4 . विभिन्न सेवाएँ ( Miscellaneous Services )
उपर्युक्त सेवाओं के अतिरिक्त वाणिज्यिक बैंक अन्य अनेक सेवाएँ प्रदान करते हैं । बैंक अपने ग्राहकों को लॉकर्स की सविधा देकर उनकी मूल्यवान वस्तुओं के अभिरक्षक ( Custodian ) के रूप में भी कार्य करता है । इन लॉकर्स में ग्राहक अपने आभूषण और मूल्यवान दस्तावेज रख सकते हैं ।

 बैंक चेक ड्राफ्ट यात्री - चेक इत्यादि के रूप में विभिन्न प्रकार के साख - साधन भी जारी करता है जिससे विनिमय आसान हो जाता है । बैंक ATM सुविधा भी प्रदान करते हैं जिसके अनुसार बैंक के ग्राहक किसी भी समय अपने डेबिट कार्ड से एक निश्चित राशि निकाल और जमा करा सकते हैं