Reserve Bank of India 

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Reserve Bank of India


Structure of Reserve Bank of India 

भारतीय रिजर्व बैंक के सामान्य प्रबंधन एवंनिर्देशन का कार्य 20 सदस्यों की एक केंद्रीय निवेशक मण्डल द्वारा किया जाता है ।

केंद्रीय निवेशक मण्डल में एक गवर्नर , 4 डिप्टी गवर्नर एक वित्त मंत्रालय द्वारा नियुक्त सरकारी अधिकारी और भारत सरकार द्वारा नामित 10 ऐसे निदेशक होते हैं जो देश के आर्थिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा निदेशक स्थानीय बोडौं ( Local Boards ) का प्रतिनिधित्व करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत किए जाते हैं ।


भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड के अतिरिक्त स्थानीय बोर्ड भी हैं । जिनके क्षेत्रीय कार्यालय मुम्बई कोलकाता चेन्नई और नई दिल्ली में हैं।

स्थानीय बोडों में सदस्य होते हैं जो केंद्र सरकार द्वारा वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किए जाते हैं । स्थानीय बोर्ड केंद्रीय निदेशक मण्डल के आदेशानुसार कार्य करते हैं तथा समय - समय पर केंद्रीय निदेशक मण्डल को महत्वपूर्ण विषयों पर परामर्श देते । हैं । रिजर्व बैंक का मुख्यालय मुम्बईमें है 


भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य ( Functions of Reserve Bank of India )

सरकार के केंद्रीय बैंक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य –


1 . नोटों का निर्गमन ( Isssue of Paper Currency Notes )
रिजर्व बैंक एक रुपये के नोट तथा सिक्कों को छोड़कर भारत में अन्य सभी मूल्यों के नोटों तथा सिक्के को जारी करने वाली एक मात्र संस्था है । करेन्सी नोट जारी करने के लिए वर्तमान में रिजर्व बैंक नोट प्रचालन की न्यूनतम निधि पद्धति ( Minimum Reserve System ) को अपनाता है ।

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम , 1934 के अनुसार एक वित्तीय वर्ष में RBI 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक नए नोट जारी नहीं कर सकता ।


2 .सरकारी बैंकर के रूप में कार्य करना ( Banker to the Government )
रिजर्व बैंक केन्द्र तथा राज्य सरकार के बैंकर एजेंट एवं उसके वित्तीय सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है । भारतीय रिजर्व बैंक सरकार की करों से होने वाली आय को जमा करता है तथा सरकारी आदेशानुसार उसका भुगतान भी करता है ।



3 . 
बैंकों के बैंक के रूप में कार्य ( Banker ' s Bank )
भारतीय रिजर्व बैंक देश में अन्य बैंकों के लिए वही कार्य करता है जो कि अन्य बैंक अपने ग्राहकों के लिए करते है ।


4 . विदेशी विनिमय का नियंत्रण ( Control of Foreign Exchange )
रिजर्व बैंक रुपये की तुलना में विदेशी मुद्रा की विनिमय दर को नियंत्रित करने का कार्य करता है । रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार के परिरक्षक ( Custodian ) के रूप में भी कार्य करता है ।


5 . साख नियंत्रण ( Credit Control )
रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों द्वारा निर्मित साख ( Credit ) की मात्रा तथा दिशा पर नियंत्रण रखता है । रिजर्व बैंक अपने साख नियंत्रण उपायों के माध्यम से तीन उद्देश्यों विनिमय स्थिरता । मूल्य स्थिरता तथा आर्थिक स्थिरता की पूर्ति करता है ।


6 . आँकड़ों का संकलन तथा प्रकाशन ( Collection and Publication of Data )
रिजर्व बैंक मुद्रा साख बैंकिग विदेशी विनिमय उत्पादन मल्य विदेशी व्यापार भुगतान शेष आदि विषयों से सम्बंधित आँकड़ों का विश्लेषण तथा प्रकाशन करता है

RBI


आरबीआई से ऋण प्राप्ति के लिए शर्ते (Terms for getting loan from RBI)


1.कृषि क्षेत्र को दिया जाने वाला ऋण बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) से ऊपर नहीं हो सकता परन्तु इसे कम किया जा सकता है ।

2.कुल ऋण का 18 % भाग कृषि क्षेत्र में दिया जाना चाहिए । निर्यात के लिए दिया गया ऋण भी BPLR से ऊपर नहीं हो सकता ।

3.बैंकों को बचत खाते में धन जमा करने पर निर्धारित व्याज देना होगा जिसका निधारण RBI द्वारा होगा । वर्तमान व्याज की दर 3.5% वार्षिक है । सावधिक जमा की ब्याज दर निर्धारित करने के लिए बैंकों को पूर्ण स्वतंत्रता है ।

4.बैंकों के जोखिम को परखने की क्षमता बैंकों में स्वयं होनी चाहिए । ऐसे उपकरण विकसित किये जायें जिससे बैंकों का जोखिम जांचा - परखा जा सके तथा उसे कम किया जा सके जिससे उसका . नियंत्रण संभव हो ।

5.बैंकों का कार्य पेशागत ( Professional ) होना चाहिए . जिससे इसके संचालन में लाभ हो सके ।

6.बैंकों को ऐसे कर्मियों को सम्मिलित करना चाहिए जो बैंकिंग प्रणाली से अवगत हों जिससे बैंकिंग प्रणाली में कार्य - कुशलता लायी जा सके ।

7.बैंकों क्रिया - कलापों का पूर्ण विवरण उपलब्ध होना चाहिए ताकि लोगों को समझने में आसानी हो ।

8.बैंकिंग प्रणाली में पारदा प्रणाली में पारदर्शिता का समावेश करना चाहिए ताकि से अधिक लोग इस प्रणाली से जुड़ सकें ।






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