State Bank of India

State Bank of India 

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SBI

1. इम्पीरियल बैंक के विलय के निर्णय के पश्चात् । जुलाई 1955 ई . को भारतीय स्टेट बैंक समूह का गठन हुआ । भारतीय स्टेट बैंक के 6 State Bank of India सहायक बैंक थे और ये सभी मिलकर स्टेट बैंक समूह का निर्माण करते थे तथा एक ही लोगो ( Logo ) का प्रयोग करते थे ।
2.स्टेट बैंक समूह के साथ छः सम्बद्ध सहायक बैंक वस्ततः पहले रजवाड़ों के अधीन बैंकिंग सेवा प्रदान करते थे । बाद में सरकार ने प्रिवी पर्स ( Privy Purse ) की समाप्ति के पश्चात् इसका अधिग्रहण कर लिया ( अक्टूबर 1959 से मई , 1960 के मध्य ) ।
3.भारत सरकार SBI में सभी सहायक बैंकों का विलय करके इसे एक मेगा बैंक ( Mega bank ) के रूप में बदलना चाहती है । इस दिशा में पहला कदम 13 अगस्त , 2008 को उठाया गया । जब स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र का विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कर दिया गया ।

4. पुनः 19 जून 2009 को भारत सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का भारतीय स्टेट बैंक में विलय की संस्तुति कर दी । इस बैंक में भारतीय रिजर्व बैंक की शेयरधारिता पहले से ही 98.3 % थी ।
5.अप्रैल 2017 को भारतीय स्टेट बैंक के पाँच सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक का विलय कर दिया गया है । विलय के पश्चात् भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं की संख्या 24000 हो गई हैं । भारतीय स्टेट बैंक में विलय होने वाले पाँचो बैंक निम्नलिखित हैं
1 . स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद
2 स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर
3 . स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
4 . स्टेट बैंक ऑफ पटियाला
5 . स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर

स्टेट बैंक देश का पहला वाणिज्यिक बैंक है जिसे नाबार्ड ने स्वयं सहायता प्रोन्नयन , संस्थान का दर्जा दिया है । SBI ने स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के लिए सहयोग निवास नामक योजना चलाई है ।
SBI द्वारा ग्रीन चैनल काउंटर ( Green Channel Counter ) का प्रारम्भ - स्टेट बैंक ने 1 जुलाई , 2010 से अपनी चुनिंदा शाखाओं में ग्रीन बैंकिंग चैनल नामक कई सेवाओं को प्रारम्भ किया है । ग्रीन चैनल काउंटर पर ग्राहक धन जमा करने तथा निकालने हेतु डेबिट कार्ड ( Debit Card ) का प्रयोग कर सकेंगे । यहाँ पर किसी कागज का प्रयोग नहीं होगा



मौद्रिक एवं साख नीति ( Monetary and Credit Policy )  
1.किसी देश की सरकार अथवा केंद्रीय बैंक द्वारा विशेष आर्थिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ( जैसे मूल्य स्थिरता , विनिमय दर में स्थिरता , रोजगार , आर्थिक विकास की दर को बढ़ाने आदि ) अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा के प्रसार तथा संकुचन के प्रबंधन को मौद्रिक नीति ( Monetary Policy ) कहा जाता है ।

मौद्रिक नीति में निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मुद्रा एवं साख की मात्रा को नियमित एवं नियंत्रित किया जाता है । एक अच्छी मौद्रिक नीति वह है जिसमें आंतरिक मूल्य स्तर में सापेक्षिक स्थिरता , विनिमय दरों में स्थायित्व , आर्थिक विकास , आर्थिक स्थिरता और रोजगार की समुचित व्यवस्था की जा सके ।

मौद्रिक नीति का कोई निश्चित व अपरिवर्तनशील सिद्धांत नहीं है । वरन् देश , काल एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार इसमें परिवर्तन किया जा सकता है । भारत में यह नीति भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित की जाती है ।
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