Hindi moral story for kid


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Hindi moral stories of Lion and lomadi



एक बार एक शेर था वह जंतुओं का राजा था । एक दिन उसने जंतुओ और पक्षियों को अपने पास बुलाया । हाथी , बाघ , हिरण , लोमड़ी , बाज़ , बत्तख और मेंढक उसके पास आए । शेर पत्थर पर बैठ गया । जंतु उसके निकट बैठ गए । तब शेर ने कहा , " मैं तुम्हारा राजा हूँ । मेरा मंत्री कौन बनेगा ?


 
Hindi moral stories of Lion and lomadi

Hindi moral stories of Lion and lomadi

शेर ने जंतुओं और पक्षियों की ओर देखा 

सबसे पहले हाथी बोला । उसने कहा , " मैं बड़ा और ताकतवर हूँ , मैं वृक्षों से आपके लिए पत्तियों और फल ला सकता हूँ । मैं आपके राज्य की निगरानी रख सकता हूँ । मैं आपका मंत्री बनूंगा


अब , बाघ बोला ,मैं बहुत ताकतवर हूँ । मैं जंतुओं को मार सकता हूँ और आपके लिए भोजन ला सकता हूँ । मैं आपका मंत्री बनूँगा ।


बाज ने कहा , " हे राजा मेरी ओर देखो मेरे पास मजबूत पंख हैं  मैं आकाश में उड़ सकता हूँ । मैं आकाश से आपके राज्य की देखभाल कर सकता हूँ ।

उसके बाद बत्तख बोली । उसने कहा , " मैं उड़ नहीं सकती हूँ परंतु मैं तैर सकती हूँ । आपके राज्य में नदियाँ और तालाब हैं । मैं वहाँ से आपके लिए अच्छी मछलियाँ ला सकती हूँ । मैं आपकी मंत्री बनूँगी





मेढक बोला हे राजा  उसने कहा  मैं धरती पर रह सकता हूँ और मैं जल में रह सकता हूँ । मैं धरती और साथ ही साथ जल की देखभाल कर सकता हूँ । मैं आपका मंत्री बनूँगा



सबसे अंत में लोमड़ी बोली , " ओ राजा । न मैं बड़ी हूँ और न ताकतवर हूँ । मैं जंतुओं को नहीं मार सकती हूँ । मैं न उड़ सकती हूँ और न तैर सकती हूँ । मगर मैं चतुर हूँ । ये जंतु चतुर नहीं हैं । मैं आपकी मंत्री बनूँगी ।


अंत में शेर बोला लोमड़ी मेरा मंत्री बनेगी






Hindi story Part-2


the story in Hindi of flying



 मानव आकाश में पक्षियों को उड़ते देखकर उत्तेजित होता था । उसे भी उड़ने की इच्छा हुई और वह इसके लिए रास्ते खोजने लगा । भारी शरीर और पंख न होने के कारण , वह अपना साहस छोड़ देता । मगर आकाश में उड़ने की उसमें तीव्र इच्छा थी ।

 
the story in Hindi of flying

the story in Hindi of flying

उड़ने का प्रथम प्रयास जॉन मैन नामक एक उत्सुक और साहसी नवयुवक द्वारा किया गया था । उसने दो पंख बनाए और उन्हें पकड़े हुए वह किले की ऊँची दीवार से कूद गया ।
आह ! वह सतह पर गिर गया और अपने आपको चोटिल कर लिया । यह उड़ने का प्रथम एतिहासिक प्रयास था ।


उसने दो पंख बनाए और उन्हें पकड़े हुए वह किले की ऊंची दीवार से कूद गया । आह ! वह सतह पर गिर गया और अपने आपको चोटिल कर लिया । यह उड़ने का प्रथम एतिहासिक प्रयास था


लगभग 200 वर्ष पूर्व फ्रांस के माउन्ट और गॉलफियर नामक भाईयों ने गुब्बारा बनाया । वह पतले कपड़े का बना हुआ था ।

उन्होंने आग जलाकर उसे गर्म हवा और धुएँ से भर दिया । उन्होने गुब्बारे से एक टोकरी लटका दी ।

टोकरी में भेड़ , मुर्गी और बत्तख को रखा गया । गुब्बारा फ्रांस के राजा और रानी की उपस्थिति में उड़ने के लिए तैयार था ।

माउंट गॉल्फियर भाईयों ने गुब्बारे को उड़ाया उसने सफल उड़ान भरी । अत  जंतु और पक्षी उड़ान भरने वाले प्रथम यात्री थे ।


इस सफल प्रयोग से लोगों को प्रोत्साहन मिला । फ्रांस के गेजियर ने एक और गुब्बारा बनाया । वह और उसका मित्र लैन्डस गुब्बारे की सहायता से उड़े । वह हवा में बीस मिनट तक रहे । हवा में उड़ने वाले वे संसार के प्रथम व्यक्ति थे ।


हाइड्रोजन गैस के आविष्कार के पश्चात् गुब्बारे में उड़ना सरल हो गया क्योंकि हाइड्रोजन गैस वायु से हल्की होती है । अब , हवा को बार - बार गर्म करने की कोई आवश्यकता नहीं थी । चास ग्रीन ने सफलतापूर्वक लंदन से 500 किमी तक की दूरी 18 घंटों में तय की ।



गुब्बारे में उड़ने में सबसे बड़ी कमी थी कि इसे इच्छित दिशा में मोड़ा नहीं जा सकता था । इसका परिणाम ग्लाइडर के आविष्कार के रूप में सामने आया ।

ग्लाइडर में कोई मशीन नहीं चौ । उसमें केवल पख थे । उड़ान सरल थी फिर भी इसके संचालन पर कोई नियंत्रण नहीं था ।


राइट बंधुओं इसमें मशीन डाल दी । उन्होंने ग्लाइडर के मशीनीकरण में उल्लेखनीय सुधार किया । अब इसे इच्छित दिशा में मोड़ा जा सकता था और सफलतापूर्वक उड़ाया जा सकता था । राइट बधुओं को हवाई जहाज का आविष्कारक कहा जाता है ।

7 सितम्बर  1903 की पतः राइट बंधुओं का हवाई जहाज हवा में था और लोग आश्चर्यचकित थे ।


Moral Hindi story Part-3

Hindi moral story for kids






राबर्ट ब्रूस स्कॉटलैंट का राजा था , उसके कई सारे शत्रु थे । उसके शत्रु ने उस पर आक्रमण कर दिया । उसने बहादुरी से अपने शत्रु का सामना किया । परंतु उसकी हार हो गई । फिर भी उसने अपना धैर्य नहीं खोया ।

उसने पुन सेना को संगठित किया और अपने शत्रु से युद किया । वह पुनः युद्ध हार गया । इस प्रकार उसने कई बार अपने शत्रु से युद्ध किया , परंतु हर बार उसकी हार हुई । आखिरकार उसे अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने की आशा नहीं रही । उसने अपने आपको एक गुफा में छिपा लिया

 
Hindi moral story for kids

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वह एक निर्जन स्थान पर बैठ गया और अपने दुर्भाग्य को कोसने लगा । तभी उसने देखा कि एक मकड़ी अपने जाले की ओर जाने का प्रयास कर रही हैं । परंतु कुछ समय बाद वह नीचे गिर गई । परंतु मकड़ी ने बार बार  प्रयास किया ।

वह अपने प्रयास में आठ बार विफल हुई । नवे प्रयास में वह अपने लक्ष्य तक पहुंच गई । तब ब्रूस ने स्वयं से कहा  अगर यह नन्हीं मकड़ी बार  बार प्रयास करके सफलता प्राप्त कर सकती है  तो मैं क्यों नहीं

उसने पुन एक विशाल सेना एकत्रित की । उसने अपने शत्रु के विरूद्ध युद्ध किया और विजयी हुआ । यह सिद्ध करता है कि हमें कभी आशा नहीं छोड़नी चाहिए , बार बार प्रयास करना चाहिए और सफलता अंत में मिलती है

Hindi story Part-4

 Hindi kahaniya of ram chanda


वनवास के समय , लक्षमण ने बन में  आते हुए लोगों का विशाल जुलूस देखा । वे चिल्लाए  हे राम भईया हे भैया भरत यहा अपनी लोभनी माता के साथ आप से लड़ाई अर्ने के लिए यहा आ रहा है वह हमेशा के लिए अपनी मार्ग साफ चाहता है ताकि वह बिना किसी विरोध का अयोध्या पर शासन कर सके


राम ने डॉटा , " नहीं भरत वैसा सोच भी नहीं सकता है जैसा तुम कह रहे हो । यहाँ तक कि भारत का सिहांसन भी उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित नहीं कर सकता है । वह निश्चित हो अपने हृदय में कुछ प्रेमपूर्ण उद्देश्य लिए हुए आ रहा होगा


Hindi kahaniya of ram chanda

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जुलूस राम की कुटिया तक पहुंचा । राजकुमार राम ने भरत का अभिवादन किया । लक्ष्मण अभी भी शंकालू थे । भरत् राम के पैरो पर गिरकर बुरी तरह रोने लगे ।

रोते हुए भारत ने कहा , " भईया , में बुरी तरह शर्मिदा हूँ कि मेरी माता ने आपको बलपूर्वक वनवास पर भेज दिया और सिंहासन मेरे लिए रिक्त  कर दिया । हे भईया पिता जी का निधन हो गया है



राम ने भरत को गले लगा लिया और भरत अभी भी कह रहे थे , " मैं कभी भी आपका स्थान नहीं लूंगा । हमारे ज्येष्ठ भ्राता होने के कारण अयोध्या का राज सिंहासन सदा आपका रहेगा ।




राम ने कहा मैंने पूरे चौदह वर्ष वनवास में गुजारने का वचन दिया है । नहीं , मैं अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोडूंगा । तुम अयोध्या लौट जाओ और मेरे स्थान पर राज करो , " राम ने कहा । राम अपने शब्दों पर दृढ़ थे ।




भरत ने कहा परंतु मैं आपके सिंहासन पर नहीं बैलूंगा । केवल आपकी खड़ाऊँ हो उस राजगद्दी पर रहेगी । भरत केवल राम को आजानुसार ही कार्य करेगा


निस्वार्थता और प्रेम का दृश्य दृष्टिगोचर था । भरत अयोध्या लौट गए । चौदह वर्षों तक राम की खड़ाऊँ अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान रहीं । किसी भी पल , भरत अपने बड़े भाई को धोखा देने के लिए नहीं ललचाए





राम चौदह वर्षों के पश्चात् सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौट आए । लोग प्रसन्न थे । उन्होंने अपने राजा के वापस आने पर खुशियों मनाई । आज हम इस दिन को दीपावली के रूप में मनाते हैं ।


रामायण एक महाग्रंथ है जो साफ –साफ निस्वार्थता, सभी के लिए प्रेम, माता पिता की आज्ञा मानना और अंततः बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय को दर्शाता है 
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